हाई ब्लड प्रेशर बना युवाओं के लिए बड़ा खतरा, विशेषज्ञ बोले- समय पर जांच से बच सकती है जान
- By Gaurav --
- Sunday, 12 Jul, 2026
High Blood Pressure Rising Among
भागदौड़ भरी जीवनशैली, असंतुलित खानपान, बढ़ते तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत में लगभग 20 प्रतिशत वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, संतुलित जीवनशैली और नियमित उपचार से इस गंभीर बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
NFHS-6 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
NFHS-6 (2023-24) के अनुसार, भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु की 19.4 प्रतिशत महिलाओं और 22.1 प्रतिशत पुरुषों को उच्च रक्तचाप है या वे इसके लिए दवा ले रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक है।
बिना लक्षण के बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च रक्तचाप को अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जाता है, क्योंकि अधिकांश मामलों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब हृदयाघात, स्ट्रोक या किडनी की बीमारी जैसी गंभीर जटिलताएं सामने आ जाती हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट लंग्स डिजीज रिसर्च सेंटर के चेयरमैन और आईलिव कनेक्ट के संस्थापक डॉ. राहुल चंदोला के अनुसार, अधिकांश युवा मरीज खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करते हैं। उन्हें अक्सर नियमित स्वास्थ्य जांच, ऑपरेशन से पहले की जांच या किसी हृदय संबंधी आपात स्थिति के दौरान पता चलता है कि उनका रक्तचाप बढ़ा हुआ है।
घर पर नियमित जांच की सलाह
डॉ. चंदोला ने कहा कि अस्पताल में कराई गई एक बार की जांच केवल उस समय का रक्तचाप बताती है, जबकि वास्तविक स्थिति जानने के लिए लंबे समय तक नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटर की मदद से घर पर नियमित जांच करने से बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों ने विशेष रूप से मोटापा, मधुमेह, पारिवारिक हृदय रोग के इतिहास वाले लोगों और सभी वयस्कों को समय-समय पर रक्तचाप की जांच कराने की सलाह दी है।